CG News: प्रवर्तन निदेशालय से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को करीब 11 महीने बाद कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया गया। जनवरी में गिरफ्तारी के बाद यह उनकी पहली पेशी बताई जा रही है, जिसे लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज है। (11 mahine baad kawaski lakhma ki Court me peshi)
कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में कवासी लखमा को अदालत लाया गया। पेशी के दौरान उन्होंने अपनी सेहत और कानूनी अधिकारों को लेकर गंभीर आरोप लगाए। (11 महीने बाद जेल से बाहर आए कवासी लखमा)
कोर्ट से बाहर मीडिया से बातचीत में कवासी लखमा (Kawasi Lakhma) ने कहा कि वह लंबे समय से हार्ट, बीपी और शुगर के मरीज हैं, इसके बावजूद उन्हें अच्छा इलाज नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार मांग करने के बावजूद उन्हें समय पर अदालत में पेश नहीं किया गया, जो उनके कानूनी अधिकारों का उल्लंघन है। (11 महीने बाद कवासी लखमा की पेशी)

पूर्व मंत्री ने कहा कि वह लगातार कोर्ट में पेशी की मांग कर रहे थे, लेकिन 11 महीने बाद उन्हें पहली बार अदालत लाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जेल में रहते हुए उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
कवासी लखमा ने विधानसभा सत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते सदन में उपस्थित होना उनका अधिकार और कर्तव्य है, लेकिन जेल में बंद होने के कारण वह सत्र में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इलाज के लिए बाहर ले जाने की मांग भी की गई थी, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
मीडिया से बातचीत में कवासी लखमा ने कहा कि उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “अब ऊपर वाला ही जाने,” जिससे उनकी स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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