रायपुर। Gandhi Jayanti 2025 : 2 अक्टूबर को पूरे देश में गांधी जयंती मनाई जाती है । हर साल हम महात्मा गांधी की याद में कार्यक्रम करते हैं, भाषण सुनते हैं और किताबों में उनके जीवन के बारे में पढ़ते हैं। लेकिन सवाल ये है कि उनकी सोच और उनके विचार आज के समय में, जब हर चीज़ सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ही चलती है, कितने काम के हैं।
गांधी हमेशा कहते थे अहिंसा, सत्य और सादगी ही असली ताकत हैं। उनके लिए जीवन का मकसद सिर्फ़ खुद के लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी जीना था। उनका मानना था कि बदलाव धीरे-धीरे और समझदारी से ही आता है। आज का जमाना बिल्कुल अलग है। सब कुछ जल्दी फैलता है, खबरें मिनटों में वायरल हो जाती हैं। ऐसे में अगर गांधी आज होते, तो क्या वे ट्विटर, इंस्टाग्राम या फेसबुक पर अपने विचार साझा करते?
कुछ लोग मानते हैं कि गांधी आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। वे हर छोटे कदम में लोगों को सोचने और समझने के लिए प्रेरित करते। शायद वो छोटे वीडियो बनाकर, सोशल मीडिया पर अपने विचार और सीख साझा करते। जैसे “सत्य की राह चुनो, चाहे रास्ता मुश्किल हो”, या “किसी का अपमान किए बिना अपनी बात रखो”। उनकी ये बातें आज भी उतनी ही असरदार हैं, बस हमें उन्हें समझने की जरूरत है।
गांधी जयंती हमें यही याद दिलाती है कि महात्मा गांधी सिर्फ इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं हैं। उनके विचार, उनकी सादगी और उनका संघर्ष आज भी हमारी जिंदगी और समाज में बदलाव ला सकते हैं। हमें बस जरूरत है कि हम उन्हें सिर्फ याद न करें, बल्कि अपनी जिंदगी में अपनाएं।
गांधी कहते थे “आपको दुनिया में बदलाव लाना है तो पहले खुद में बदलाव लाओ।” यही सीख हमें आज भी, डिजिटल और तेज़ दुनिया में, अपने व्यवहार और सोच में बदलवा सकती है।
गांधी जयंती के दिन हम सिर्फ उन्हें याद करने तक सीमित न रहें। उनके विचारों को समझें, अपनाएं और कोशिश करें कि समाज और अपने आसपास की दुनिया में बदलाव लाएं।
