Raipur News: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्यवाही करते हुए 29 आबकारी अधिकारियों के खिलाफ 2300 पन्नों का चतुर्थ पूरक चालान विशेष अदालत में पेश किया है, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।
कोर्ट ने अब सभी आरोपियों को 20 अगस्त 2025 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश देते हुए नोटिस जारी किया है। इससे पहले EOW ने सभी आरोपियों को न्यायालय में उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया था, लेकिन कोई भी आरोपी कोर्ट में पेश नहीं हुआ। इसके बाद कोर्ट ने यह कड़ा कदम उठाया।
किन-किन अधिकारियों को बनाया गया है आरोपी?
इस घोटाले में जिन 29 अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है, उनमें सहायक आयुक्त, उपायुक्त, जिला आबकारी अधिकारी और सेवानिवृत्त अधिकारी शामिल हैं:
जनार्दन कौरव, अनिमेष नेताम, विजय सेन शर्मा, अरविंद कुमार पाटले, प्रमोद नेताम, रामकृष्ण मिश्रा, विकास गोस्वामी, इकबाल खान, नितिन खंडुजा, नवीन तोमर, मंजुश्री कसेर, सौरभ बख्शी, दिनकर वासनिक, मोहित जायसवाल, नीतू ठाकुर, गरीबपाल सिंह दर्दी, नोहर ठाकुर, सोनल नेताम, प्रकाश पाल, अलेख राम सिदार, आशीष कोसम, ए.के. सिंह, राजेश जायसवाल, जे.आर. मंडावी, जी.एस. नुरुटी, देवलाल वैद्य, ए.के. अनंत, वेदराम लहरे, एल.एल. ध्रुव।
क्या है बी-पार्ट शराब घोटाला?
इस घोटाले की शुरुआत वर्ष 2019 से 2023 के बीच मानी जाती है, जब प्रदेश के 15 बड़े जिलों में पदस्थ आबकारी अधिकारियों ने बिना एक्साइज ड्यूटी चुकाई हुई देशी शराब (B-Part शराब) को शासकीय शराब दुकानों में अवैध रूप से बेचना शुरू किया।
बस्तर और सरगुजा को छोड़कर बाकी जिलों में डिस्टलरी से सीधे शराब भेजी जाती थी, जिसे वैध शराब की तरह समानांतर बेचा जाता था। इस नेटवर्क में डिस्टलरी, ट्रांसपोर्टर, सुपरवाइजर, मैनपावर एजेंसी, सेल्समैन और आबकारी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी शामिल थे।
घोटाले की राशि 3200 करोड़ तक पहुंची
EOW/ACB द्वारा अब तक की गई जांच और 200 से अधिक व्यक्तियों के बयान एवं डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अनुमान है कि लगभग 60,50,950 पेटी बी-पार्ट शराब की अवैध बिक्री हुई है, जिसकी अनुमानित कीमत 2174 करोड़ रुपये से अधिक है। पहले इस घोटाले का अनुमान 2161 करोड़ रुपये था, लेकिन नवीनतम आंकड़ों के अनुसार घोटाले की कुल राशि 3200 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
