CG News: मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक संसाधनों के साथ ज्ञान, विज्ञान, तकनीक और नवाचार की ताकत से समृद्ध बनाना राज्य सरकार का लक्ष्य है। प्रदेश को औद्योगिक और आर्थिक विकास के साथ वैज्ञानिक अनुसंधान, उच्च शिक्षा, आधुनिक तकनीक और चिकित्सा नवाचार के क्षेत्र में भी अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने राजधानी रायपुर स्थित निवास कार्यालय में भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु के निदेशक प्रोफेसर जी. रंगराजन, संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और राज्य शासन के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में यह बात कही। बैठक में छत्तीसगढ़ को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, उच्च शिक्षा, कौशल विकास और चिकित्सा अनुसंधान के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
वैज्ञानिक संस्थानों की विशेषज्ञता का मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय विज्ञान संस्थान देश और दुनिया के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों में शामिल है। इसकी अनुसंधान क्षमता और शैक्षणिक अनुभवों का लाभ छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों, उद्योगों, स्वास्थ्य सेवाओं और युवाओं तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विज्ञान, तकनीक, अंतरिक्ष अनुसंधान, डिजिटल नवाचार और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत के निर्माण में वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी दक्षता की महत्वपूर्ण भूमिका है। छत्तीसगढ़ भी इसी दिशा में विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए आगे बढ़ रहा है।
दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं को मिलेगा अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि वैज्ञानिक शिक्षा और अनुसंधान का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बस्तर, सरगुजा सहित ग्रामीण, जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों में भी प्रतिभाओं की कमी नहीं है।
उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक प्रयोगशालाएं, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और तकनीकी प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। इससे प्रदेश की नई पीढ़ी को बेहतर अवसर मिलेंगे।
3 बड़ी परियोजनाओं पर हुई चर्चा
बैठक में भारतीय विज्ञान संस्थान और छत्तीसगढ़ शासन के बीच तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की गई। इनमें विश्वस्तरीय मटेरियल परीक्षण केंद्र की स्थापना, विज्ञान और गणित के उत्कृष्ट शिक्षक तैयार करने के लिए चार वर्षीय बीएससी-बीएड संस्थान और चिकित्सा अनुसंधान एवं स्वास्थ्य तकनीक के क्षेत्र में सहयोग शामिल है।
इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में वैज्ञानिक अधोसंरचना विकसित करने, उच्च शिक्षा को मजबूत करने और अनुसंधान आधारित विकास को बढ़ावा देने की योजना पर विचार किया गया।
मटेरियल परीक्षण केंद्र से उद्योगों को मिलेगा लाभ
छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित विश्वस्तरीय मटेरियल परीक्षण केंद्र खनिज, इस्पात, धातु, ऊर्जा और उन्नत निर्माण क्षेत्र के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। इस केंद्र में आधुनिक परीक्षण तकनीक, नैनो तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक और चुंबकीय पदार्थों का अध्ययन तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित वैज्ञानिक विश्लेषण जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
इससे प्रदेश के उद्योगों, विश्वविद्यालयों, शोधार्थियों और स्टार्टअप को उच्चस्तरीय अनुसंधान सुविधाएं मिल सकेंगी। साथ ही उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने और नई तकनीकों के विकास में मदद मिलेगी।
विज्ञान और गणित के बेहतर शिक्षक तैयार होंगे
बैठक में विज्ञान और गणित शिक्षा को मजबूत करने के लिए चार वर्षीय एकीकृत बीएससी-बीएड संस्थान की स्थापना के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। इस संस्थान का उद्देश्य विज्ञान और गणित विषयों में आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से प्रशिक्षित शिक्षकों की नई पीढ़ी तैयार करना है। इसमें भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित के साथ वैज्ञानिक सोच, अनुसंधान और समस्या समाधान जैसे विषयों पर भी ध्यान दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही वैज्ञानिक सोच की नींव है। बेहतर शिक्षक तैयार होने से प्रदेश के विद्यार्थियों को विशेष रूप से ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण विज्ञान शिक्षा मिल सकेगी।
स्वास्थ्य तकनीक और चिकित्सा अनुसंधान में सहयोग
बैठक में चिकित्सा अनुसंधान, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं और आधुनिक स्वास्थ्य तकनीकों के क्षेत्र में भी सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की गई। इसमें सस्ती जांच तकनीक, आधुनिक चिकित्सा उपकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्वास्थ्य सेवाएं, क्लिनिकल रिसर्च और स्वास्थ्य क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर जोर दिया गया।
हब एंड नेटवर्क मॉडल के माध्यम से भारतीय विज्ञान संस्थान को छत्तीसगढ़ के अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों से जोड़कर संयुक्त अनुसंधान की संभावनाओं पर विचार किया गया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भारतीय विज्ञान संस्थान के साथ प्रस्तावित योजनाओं की तकनीकी, वित्तीय और संस्थागत संभावनाओं का अध्ययन कर समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार से जुड़े इन प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार पूरा सहयोग देगी।


