Mohan Bhagwat Bilaspur Visit: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत आज और कल बिलासपुर दौरे पर रहेंगे। वे गुरुवार शाम 4 बजे बिलासपुर पहुंचेंगे। यहां कोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में शाम 7 बजे से 8 बजे तक बौद्धिक वर्ग को संबोधित करेंगे। इसके बाद वे इसी परिसर में रात्रि विश्राम करेंगे।
डॉ. मोहन भागवत के दौरे को देखते हुए संघ के पदाधिकारी और जिला प्रशासन तैयारियों में जुटे हुए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरस्वती शिशु मंदिर परिसर, आसपास के क्षेत्रों और रेलवे स्टेशन पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
छत्तीसगढ़ में संगठनात्मक बदलाव पर चर्चा
मोहन भागवत के दौरे के दौरान छत्तीसगढ़ में संघ के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव को लेकर चर्चा होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि प्रदेश में संघ के प्रांत प्रमुख के पद को समाप्त कर प्रांत को दो हिस्सों में बांटने की योजना पर विचार किया जा सकता है।
इसके तहत छत्तीसगढ़ को रायपुर और बिलासपुर विभागों में बांटने की तैयारी है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ प्रांत को 11 विभागों में विभाजित किया गया है। प्रस्तावित बदलाव के बाद रायपुर में 6 और बिलासपुर में 5 विभाग शामिल हो सकते हैं।
गोंडवाना एक्सप्रेस से पहुंचेंगे बिलासपुर
संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत नागपुर से गोंडवाना एक्सप्रेस के जरिए बिलासपुर पहुंचेंगे। यहां से वे सीधे कोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर जाएंगे। बौद्धिक वर्ग में संघ के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग शामिल होंगे।
इस दौरान डॉ. भागवत सामाजिक विषयों, संगठन के विस्तार और भविष्य की योजनाओं को लेकर मार्गदर्शन दे सकते हैं।
युवाओं को जोड़ने की रणनीति पर जोर
बताया जा रहा है कि संघ आने वाले समय में युवाओं को संगठन से जोड़ने की योजना पर काम कर रहा है। इसके तहत 40 साल से कम उम्र के युवाओं को अलग-अलग गतिविधियों के माध्यम से संघ से जोड़ने पर ध्यान दिया जा रहा है।
इस दौरान युवा संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं को भी संगठन विस्तार और सामाजिक कार्यों को लेकर मार्गदर्शन दिए जाने की संभावना है।
कल होगी प्रांत कार्यकारिणी की बैठक
मोहन भागवत 23 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ प्रांत के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की बैठक लेंगे। इसमें प्रदेश के संघ पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल होंगे। बैठक में संगठन की गतिविधियों, आगामी योजनाओं और शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा की जाएगी।
बैठक में विभाग और योजना प्रमुख अपने-अपने क्षेत्रों की रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद आने वाले समय के लिए संगठन की रणनीति तय की जाएगी।



