Navratri 2026: नवरात्रि के पहले दिन होती है मां शैलपुत्री की पूजा; जानें पूजन विधि, शुभ मुहूर्त और मंत्र

Navratri 2026: आज 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ हो रहा है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता है कि मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा करने पर सुख-समृद्धि, सौभाग्य, आरोग्य और मनोकामनाओं की प्राप्ति होती है।

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार घटस्थापना ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में करना शुभ माना जाता है।

  • घटस्थापना मुहूर्त – सुबह 06:31 बजे से 10:27 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:01 बजे से 12:49 बजे तक

मां शैलपुत्री का मंत्र

  • ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नमः

इस मंत्र का श्रद्धा और क्षमता के अनुसार जाप करना शुभ माना जाता है।

मां शैलपुत्री की कथा

धार्मिक मान्यता के अनुसार मां शैलपुत्री पूर्व जन्म में माता सती थीं। पिता दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान सहन न कर पाने पर उन्होंने योगाग्नि में अपना शरीर त्याग दिया। अगले जन्म में पर्वतराज हिमालय के यहां जन्म लेने के कारण उनका नाम शैलपुत्री पड़ा। मां शैलपुत्री बैल पर सवार रहती हैं। उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल सुशोभित रहता है।

मां शैलपुत्री की आरती

वंदे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम।
वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

पूर्णेन्दु निभां गौरी मूलाधार स्थितां प्रथम दुर्गां त्रिनेत्राम्।
पटाम्बर परिधानां रत्नाकिरीट नामालंकार भूषिताम्॥

मां को क्या भोग लगाएं

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री को शुद्ध घी का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे उत्तम स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

दुर्गा सप्तशती पाठ का महत्व

नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका पाठ करने से भय, बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है तथा परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

मां शैलपुत्री पूजन विधि (Maa Shailputri Pujan Vidhi)

  1. मां शैलपुत्री की पूजा करने के लिए आपको सूर्योदय से पहले उठना चाहिए। इसके बाद स्नान-ध्यान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए।
  2. माता को श्वेत वस्त्र अति प्रिय हैं इसलिए नवरात्रि के पहले दिन सफेद कपड़े पहनकर आपको माता की पूजा करनी चाहिए। सफेद वस्त्र न हों तो पीले वस्त्र भी आप धारण कर सकते हैं।
  3. इसके बाद आपको गंगाजल से पूजा स्थल को स्वच्छ करना चाहिए और घट स्थापित करना चाहिए।
  4. घटस्थापना के साथ ही नवरात्रि के व्रत का संकल्प भी आपको लेना चाहिए। फिर पूजा स्थल पर धूप-दीप जला लें।
  5. संकल्प लेने का बाद माता शैलपुत्री की पूजा शुरू करें।
  6. माता को सिंदूर, अक्षत, सफेद फूल, दूध या घी से बना मिष्ठान आदि आपको अर्पित करना चाहिए।
  7. पूजा के दौरान माता के मंत्र, कथा आदि का पाठ भी अवश्य करें।
  8. पूजा के अंत में माता शैलपुत्री की आरती का पाठ अवश्य करें।

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