CG Malaria Case: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में मलेरिया के अचानक बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। बीते दो दिनों में सरकारी छात्रावास में रहने वाले 2 छात्रों की मलेरिया से मौत हो गई है। वहीं दूसरे छात्रावास के 11 छात्रों की जांच रिपोर्ट मलेरिया पॉजिटिव आई है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में विशेष निगरानी शुरू कर दी है।![]()
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में अचानक मलेरिया के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। प्रभावित छात्रावासों और आसपास के गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें कैंप लगाकर लोगों की जांच कर रही हैं। संक्रमित मरीजों को दवाएं दी जा रही हैं और सभी छात्रावासों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश जारी किए गए हैं।
3 बहनों में एक की मौत
डोमाहर्रा गांव की रहने वाली तीन सगी बहनों को तेज बुखार होने पर शुक्रवार को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इनमें 9 वर्षीय करीना विश्वकर्मा की 25 जुलाई को इलाज के दौरान मौत हो गई। उसकी दोनों बहनों का अस्पताल में उपचार जारी है।
छात्रावास के छात्र की भी गई जान
मर्दापोटी छात्रावास में कई छात्रों को बुखार और सिरदर्द की शिकायत हुई थी। जांच में 4 छात्र मलेरिया संक्रमित पाए गए। इनमें 9 वर्षीय छात्र सुभाष कुमेटी की तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे घर ले गए थे। रविवार सुबह हालत गंभीर होने पर उसे दोबारा जिला अस्पताल लाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
22 जुलाई तक नहीं मिला था कोई संक्रमित
आदिम जाति कल्याण विभाग की सहायक आयुक्त जया मनु ने बताया कि 22 जुलाई को सभी छात्रावासों में बच्चों की स्वास्थ्य जांच कराई गई थी। उस समय कोई भी बच्चा मलेरिया संक्रमित नहीं मिला था। हालांकि 24 जुलाई के बाद अचानक मलेरिया के मामले सामने आने लगे।
अचानक हुआ मलेरिया का प्रकोप
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरसी ठाकुर ने बताया कि जिले में अचानक मलेरिया का प्रकोप सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार छात्रावासों और प्रभावित क्षेत्रों में जांच कर रही हैं। 22 जुलाई तक कोई भी बच्चा संक्रमित नहीं था, लेकिन 24 जुलाई के बाद हालात तेजी से बदले और दो बच्चों की मौत हो गई।
मलेरिया से बचाव
मलेरिया से बचाव के लिए मच्छरों के काटने से बचना सबसे जरूरी है। तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द या शरीर दर्द जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए। समय पर उपचार मिलने से बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है।




