Abujhmad Forest Cutting: नारायणपुर। करीब चार दशक तक नक्सल प्रभाव में रहे छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र में अब एक नई चुनौती सामने आई है। सरकार द्वारा पहली बार राजस्व सर्वे कराए जाने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में जंगलों की कटाई की जा रही है। ग्रामीणों के बीच यह धारणा फैल गई है कि सर्वे के बाद जमीन के पट्टे दिए जाएंगे, इसलिए लोग खुद को भू-स्वामी साबित करने के लिए जंगल साफ कर खेती योग्य भूमि तैयार करने में जुट गए हैं। हालात को देखते हुए प्रशासन ने अवैध कटाई रोकने के लिए राजस्व, वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम का गठन किया है।![]()
पट्टे के लिए काट रहे पेड़
जानकारी के अनुसार, अबूझमाड़ के करीब 40 गांवों में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की जा रही है। कई स्थानों पर पेड़ों को 2-3 फीट की ऊंचाई पर काटकर सूखने के लिए छोड़ दिया जा रहा है। बाद में सूखे पेड़ों को जलाया जा रहा है या खेतों की फेंसिंग में उपयोग किया जा रहा है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ वे परिवार भी वापस लौट रहे हैं, जो नक्सल हिंसा या अन्य कारणों से वर्षों पहले गांव छोड़ चुके थे।
नक्सल प्रभाव कम होने के बाद बढ़ी गतिविधियां
केंद्र सरकार द्वारा 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने के अभियान के तहत अबूझमाड़ में सुरक्षा बलों के कैंप स्थापित किए गए। नक्सली प्रभाव कम होने के बाद ग्रामीणों ने बड़े पैमाने पर जंगल साफ करना शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि पूर्व में कुछ गांवों में राजस्व सर्वे और पट्टा वितरण होने के कारण लोगों में यह विश्वास बना कि जमीन पर कब्जा करने से भविष्य में मालिकाना हक मिल सकता है।
सड़क किनारे भी दिख रही कटाई
नारायणपुर से गढ़चिरौली तक बन रही सड़क के आसपास के गांवों, जैसे नेलांगूर, पदमकोट और कच्चापाल क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई के मामले सामने आए हैं। कई स्थानों पर जंगल साफ कर नए मकान और खेती की तैयारी की जा रही है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों का भी कहना है कि ग्रामीण खेती के उद्देश्य से जंगल काट रहे हैं।
233 से अधिक गांव प्रभावित
अबूझमाड़ क्षेत्र में कुल 233 गांव हैं, जबकि इससे लगे इलाकों में करीब 100 अन्य गांव स्थित हैं। इनमें से अधिकांश गांवों में कम या ज्यादा स्तर पर जंगल की कटाई हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से इस भूमि पर रह रहे हैं और इसे अपना अधिकार मानते हैं।
संयुक्त टीम करेगी निगरानी
नारायणपुर कलेक्टर नम्रता जैन ने बताया कि अवैध कटाई की शिकायतों के बाद राजस्व, वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम बनाई गई है। टीम के साथ ग्राम सरपंचों को भी जोड़ा गया है। साथ ही एसडीएम को गांव-गांव जाकर लोगों से संवाद करने और वन संरक्षण के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।
सर्वे पूरा होने के बाद होगी स्पष्टता
प्रशासन का कहना है कि अबूझमाड़ में अब तक राजस्व सर्वे पूरा नहीं हो पाया है। सर्वे के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन-सी भूमि राजस्व विभाग, वन विभाग या अन्य विभागों के अधिकार क्षेत्र में आती है। इसके बाद ही संबंधित विभाग नियमानुसार आगे की कार्रवाई करेंगे।


