Appy Raja Death: छत्तीसगढ़ के पहले रैप सिंगर Appy Raja का सोमवार को रायपुर स्थित एम्स में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और उनका इलाज जारी था। उनके निधन की खबर से भानुप्रतापपुर सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है। उनका अंतिम संस्कार 16 जून को भानुप्रतापपुर में किया जाएगा।
एप्पी राजा ने छत्तीसगढ़ी रैप संगीत को नई पहचान दिलाई थी। उनका लोकप्रिय गीत “टूरा भोको लोलो” युवाओं के बीच बेहद चर्चित रहा और इसी गाने ने उन्हें प्रदेशभर में पहचान दिलाई।
चेतन चांडक से एप्पी राजा बनने तक का सफर
एप्पी राजा का असली नाम चेतन चांडक था। उनका जन्म वर्ष 1994 में नवागढ़ में हुआ था। उनके माता-पिता मूल रूप से राजस्थान के जैसलमेर के रहने वाले थे, जो बाद में छत्तीसगढ़ आकर बस गए।
बचपन के शुरुआती वर्ष दुर्ग में बिताने के बाद उनका परिवार कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर में रहने लगा। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और कम उम्र में ही संगीत के प्रति रुचि विकसित कर ली।
7वीं कक्षा में लिखा पहला रैप
कांकेर के एक निजी स्कूल में पढ़ाई के दौरान उन्होंने कक्षा 7वीं में अपना पहला रैप लिखा था। उस समय संसाधनों और आर्थिक तंगी के कारण वे अपने गीतों को रिकॉर्ड नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने संघर्षों के बीच अपना चर्चित गीत “टूरा भोको लोलो” लिखा, लेकिन इसे रिकॉर्ड करने का मौका उन्हें वर्षों बाद मिला।
पंजाब से मिली पहचान
साल 2015 में पंजाब की एक म्यूजिक कंपनी ने उनके रैप को सुनकर उन्हें रिकॉर्डिंग के लिए बुलाया। वहां उन्होंने अपना गीत रिकॉर्ड किया और इसे यूट्यूब पर रिलीज किया गया। गाना रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और लाखों लोगों ने इसे पसंद किया। इसके बाद एप्पी राजा छत्तीसगढ़ी रैप संगीत का जाना-पहचाना चेहरा बन गए।
आर्थिक तंगी के बीच नहीं छोड़ा सपना
जब वे 11वीं कक्षा में थे, तब उनके पिता को हार्ट अटैक आया। परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ने पर उनकी मां ने सिलाई का काम शुरू किया। परिवार की मदद के लिए एप्पी राजा गुजरात के सूरत भी गए और कपड़ों की दुकान में काम किया। हालांकि संगीत के प्रति जुनून उन्हें वापस छत्तीसगढ़ ले आया। माता-पिता के सहयोग और अपनी मेहनत के दम पर वे पंजाब पहुंचे और संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई।

