Raipur Central Jail: क्या रायपुर का सेंट्रल जेल बनेगा शॉपिंग कॉम्प्लेक्स?सरकार कर रही चर्चा…

Raipur Central Jail

Raipur Central Jail: राजधानी रायपुर के दिल में बसी 150 साल पुरानी केंद्रीय जेल, जो कभी स्वतंत्रता संग्राम के अनेक सेनानियों के संघर्ष और बलिदान की गवाह रही है, अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। सरकार इस ऐतिहासिक जेल की बेशकीमती 40 से 45 एकड़ जमीन पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और कमर्शियल हब विकसित करने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रही है।

सूत्रों के मुताबिक, इस जमीन की कीमत अरबों रुपये में आंकी गई है। अगर यह रिडेवलपमेंट मॉडल के तहत बेची जाती है, तो राज्य सरकार को सैकड़ों करोड़ रुपये का राजस्व मिल सकता है। यही पैसा आरंग के गोढ़ी गांव में नई विशेष जेल बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

गोढ़ी में 4000 कैदियों की क्षमता वाली नई जेल का प्रस्ताव

गोढ़ी में पहले से ही 85 एकड़ जमीन विशेष जेल के लिए 13 मार्च 2020 को आवंटित की जा चुकी है। 2023-24 के बजट में इस प्रोजेक्ट के लिए 436 करोड़ रुपये का प्रावधान भी था। जेल की ड्रॉइंग-डिज़ाइन तक तैयार हो चुकी थी, लेकिन निर्माण कार्य को लेकर वित्त विभाग और एनडीसीसी एजेंसी के बीच विवाद के चलते यह प्रोजेक्ट अधर में लटक गया।

वित्त विभाग ने उठाए सवाल

वित्त विभाग ने जेल विभाग से पूछा है कि यदि गोढ़ी में नई जेल बन भी जाती है, तो क्या रायपुर की मौजूदा केंद्रीय जेल पूरी तरह खाली होगी? इस पर शासन में अभी तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया है.

पुरानी जमीन पर हर सरकार की नजर

छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद से अब तक हर सरकार की नजर केंद्रीय जेल रायपुर की जमीन पर रही है. सबसे पहले जोगी सरकार ने जेल को हटाने की योजना बनाई थी. इसके बाद भाजपा सरकार ने भी इस पर विचार किया, लेकिन यह योजना कभी मूर्तरूप नहीं ले सकी. अब मौजूदा सरकार भी इस दिशा में आगे बढ़ रही है. हालांकि, रायपुर केंद्रीय जेल के ऐतिहासिक महत्व और सुरक्षा कारणों से विरोध की आशंका बनी हुई है.

रायपुर की जेल में क्षमता से दोगुना कैदी

प्रदेश की जेलों की कुल क्षमता 12,281 बंदियों की है, जबकि मौजूदा कैदी संख्या 20 हजार से ऊपर – है. रायपुर केंद्रीय जेल सहित पांच केंद्रीय जेलों में तो हालात और भी गंभीर हैं. इनकी कुल क्षमता 7005 कैदियों की है, लेकिन यहां दोगुने से ज्यादा बंदी ठूंसे गए हैं. रायपुर जेल में हार्डकोर नक्सली और कई बड़े अपराधों के सजायाफ्ता कैदी भी हैं. राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा ने कुछ महीनों पहले विधानसभा में राज्य की अन्य जेलों के साथ रायपुर जेल की हालत भी बताई थी. उन्होंने बताया था कि 1586 कैदियों की क्षमता वाली रायपुर सेंट्रल जेल में उस समय 3076 कैदी रखे गए थे. यानि क्षमता से लगभग दोगुना.

रायपुर की जमीन पर सरकार की नजर

शहर के पॉश इलाके में स्थित केंद्रीय जेल के आसपास पिछले कुछ सालों में व्यावसायिक गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं. जेल के पीछे पंडरी स्थित पुराने बस स्टैंड की जमीन पर भी रिडेवलपमेंट योजना का विचार चल रहा है. ऐसे में जेल की 40-45 एकड़ जमीन को बाजार में उतारने से राज्य सरकार को सैकड़ों करोड़ रुपए का राजस्व मिल सकता है. यही वजह है कि शासन स्तर पर गुपचुप मंथन जारी है.

गोढ़ी में 85 एकड़ जमीन आरक्षित

13 मार्च 2020 को गोढ़ी (आरंग) में 85 एकड़ जमीन विशेष जेल के लिए आवंटित की गई थी. 2023-24 के बजट में 436 करोड़ रुपए का प्राक्कलन भी शामिल था. ड्राइंग डिजाइन तक तैयार हो गई थी, लेकिन केंद्र सरकार की एजेंसी एनडीसीसी के जरिए निर्माण कराने का विवाद सामने आया. जेल मैन्युअल के मुताबिक, निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग से ही होना चाहिए, क्योंकि भविष्य में मेंटेनेंस की जिम्मेदारी भी उसी की है. यही वजह है कि प्रोजेक्ट अभी तक रुका हुआ है.

 

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