CG Leaders VIP Security: छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की बदली सुरक्षा स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने नेताओं की VIP सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद 40 नेताओं की VIP सुरक्षा वापस लेने और 50 से अधिक नेताओं की सुरक्षा श्रेणी कम करने का फैसला लिया गया है। इस निर्णय से करीब 200 पुलिस जवान सामान्य ड्यूटी के लिए उपलब्ध हो जाएंगे।
प्रदेश में फिलहाल करीब 400 नेताओं की सुरक्षा में 1550 पुलिसकर्मी तैनात हैं। सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद सरकार ने जरूरत के अनुसार सुरक्षा श्रेणियों में बदलाव किया है। अब केवल मुख्यमंत्री और राज्यपाल के पास ही जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा रहेगी।
कई नेताओं की सुरक्षा श्रेणी हुई कम
समीक्षा के बाद कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप, पूर्व मंत्री महेश गागड़ा, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और महेंद्र कर्मा के परिवार सहित कई नेताओं की सुरक्षा जेड प्लस से घटाकर जेड कर दी गई है। वहीं कुछ अन्य नेताओं की सुरक्षा भी एक श्रेणी कम की गई है।
40 नेताओं से हटाई गई सुरक्षा
जिन 40 नेताओं की सुरक्षा वापस ली गई है, उनमें बस्तर क्षेत्र के कई सरपंच, मंडल अध्यक्ष और दिवंगत नेताओं के परिजन शामिल हैं। इनमें अधिकांश एक्स श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त कर रहे थे। वहीं 50 से अधिक नेताओं की सुरक्षा श्रेणी में भी बदलाव किया गया है। उदाहरण के तौर पर कांकेर विधायक की सुरक्षा जेड से घटाकर वाई प्लस कर दी गई है।
कुछ नेताओं की सुरक्षा रहेगी यथावत
सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और सांसद महेश कश्यप सहित कुछ नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया है। जिन नेताओं को सुरक्षा की आवश्यकता बनी रहेगी, उन्हें पहले की तरह सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।
जरूरत पड़ने पर मिलेगी अतिरिक्त सुरक्षा
चीफ इंटेलीजेंस विंग के अमित कुमार ने कहा कि जिन नेताओं की सुरक्षा वापस ली गई है, उन्हें आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय स्तर पर सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। यदि किसी को विशेष खतरा होगा या संवेदनशील क्षेत्र में जाना होगा, तो स्थिति के अनुसार अतिरिक्त सुरक्षा भी दी जाएगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के कमजोर होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था की लगातार समीक्षा की जा रही है। बस्तर में अब विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं और जिन क्षेत्रों में कभी नक्सलियों का प्रभाव था, वहां अब पर्यटन और विकास को बढ़ावा मिल रहा है।


