Bastar Dussehra 2026: बस्तर दशहरा में जोगी बिठाई की रस्म संपन्न, गहरे कुंड में 9 दिन की तपस्या पर बैठे दौलत

Bastar Dussehra 2026: विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की प्रमुख परंपराओं में शामिल जोगी बिठाई की रस्म सोमवार शाम विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। ग्राम बड़े आमाबाल के निवासी दौलत लगातार तीसरी बार जोगी बनकर सिरहासार भवन में करीब चार फीट गहरे कुंड में तपस्या के लिए बैठे हैं। वे अगले नौ दिनों तक निराहार व्रत रखकर देवी की आराधना करेंगे।

Bastar Dussehra 2026: विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की प्रमुख परंपराओं में शामिल जोगी बिठाई की रस्म सोमवार शाम विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। ग्राम बड़े आमाबाल के निवासी दौलत लगातार तीसरी बार जोगी बनकर सिरहासार भवन में करीब चार फीट गहरे कुंड में तपस्या के लिए बैठे हैं। वे अगले नौ दिनों तक निराहार व्रत रखकर देवी की आराधना करेंगे।

मान्यता है कि जोगी की यह कठिन साधना बस्तर दशहरा के सभी धार्मिक अनुष्ठानों के निर्विघ्न संपन्न होने और पूरे बस्तर अंचल की सुख-समृद्धि व शांति के लिए की जाती है। मंगलवार से बस्तर दशहरा के अगले प्रमुख विधान के रूप में चार चक्कों वाले फूल रथ की परिक्रमा भी शुरू होगी।

जोगी बिठाई की रस्म

करीब 618 वर्ष पुरानी परंपरा के अनुसार जोगी बिठाई की शुरुआत मावली माता मंदिर में पूजा-अर्चना से हुई। देवी की आराधना और पारंपरिक पवित्र तलवार के पूजन के बाद दौलत ने तलवार धारण कर मुंडाबाजा और गाजे-बाजे के साथ सिरहासार भवन तक यात्रा की। धार्मिक विधान पूरे होने के बाद उन्होंने चार फीट गहरे कुंड में आसन ग्रहण कर नौ दिनों की तपस्या और निराहार व्रत का संकल्प लिया।

मान्यता और परंपरा

बस्तर दशहरा की इस अनूठी परंपरा में जोगी विजयादशमी तक साधना में लीन रहते हैं। मान्यता है कि उनकी तपस्या से देवी प्रसन्न होती हैं और दशहरा पर्व के सभी आयोजन बिना किसी बाधा के संपन्न होते हैं। इस परंपरा में केवल पुरुष ही जोगी बनते हैं और मांझी, चालकी तथा पुजारियों की उपस्थिति में सभी धार्मिक विधान पूरे किए जाते हैं।

Bastar Dussehra 2026: विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की खास धार्मिक रस्म काछनगादी शनिवार देर शाम जगदलपुर के भंगाराम चौक स्थित काछनगुड़ी में पूरी की जाएगी। इस दौरान पनका समाज की 12 वर्षीय पीहू दास पर काछनदेवी सवार होंगी और बेल के कांटों से बने विशेष झूले पर झूलकर बस्तर दशहरा पर्व मनाने की अनुमति देंगी। इसके बाद दशहरा की अन्य धार्मिक रस्मों की शुरुआत होगी।

तीसरी बार निभा रहे जिम्मेदारी

ग्राम बड़े आमाबाल के दौलत इस वर्ष तीसरी बार जोगी बिठाई की परंपरा निभा रहे हैं। नौ दिनों तक वे कुंड में रहकर देवी की आराधना करेंगे। इस धार्मिक अनुष्ठान में जोगी परिवार के साथ मांझी, चालकी और पुजारियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

आज से फूल रथ की परिक्रमा

जोगी बिठाई की रस्म के बाद मंगलवार से चार चक्कों वाले फूल रथ की परिक्रमा शुरू होगी। फूल रथ पर मां दंतेश्वरी का छत्र विराजित किया जाएगा। इसके बाद रथ को सिरहासार भवन से गोलबाजार चौक होते हुए मां दंतेश्वरी मंदिर तक पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ ले जाया जाएगा।

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