Raipur Kavi Sammelan: हिंदी दिवस विशेष सप्ताह के अंतर्गत सद्भावना साहित्य संस्थान की काव्य गोष्ठी सम्पन्न

Raipur Kavi Sammelan: रायपुर में सद्भावना साहित्य संस्थान द्वारा हिंदी दिवस विशेष सप्ताह के अंतर्गत वृंदावन हॉल, सिविल लाइंस में भव्य काव्य गोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदी भाषा के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, साहित्य के माध्यम से मातृभाषा के सम्मान की भावना को मजबूत करना और साहित्यिक संस्कृति को प्रोत्साहित करना रहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमियों, कवियों और काव्य रसिकों ने भाग लिया।

Raipur Kavi Sammelan: रायपुर में सद्भावना साहित्य संस्थान द्वारा हिंदी दिवस विशेष सप्ताह के अंतर्गत वृंदावन हॉल, सिविल लाइंस में भव्य काव्य गोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदी भाषा के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, साहित्य के माध्यम से मातृभाषा के सम्मान की भावना को मजबूत करना और साहित्यिक संस्कृति को प्रोत्साहित करना रहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमियों, कवियों और काव्य रसिकों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज, संस्कृति, प्रेम, व्यंग्य और हिंदी भाषा के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। कवि राजकुमार सोनी ने बदलते जीवन और बढ़ती जिम्मेदारियों को अपनी संवेदनशील कविता “बच्चे से बुज़ुर्ग हो गए” के माध्यम से व्यक्त किया। वहीं यशवंत यदु ‘यश’ ने भगवान श्रीगणेश को समर्पित व्यंग्य रचना प्रस्तुत करते हुए समसामयिक आर्थिक विषयों को हास्य के अंदाज में श्रोताओं तक पहुंचाया।

कवि जितेंद्र ने प्रेम और संगीत पर आधारित भावपूर्ण कविता सुनाकर श्रोताओं का मन मोह लिया। छबिलाल सोनी ने शब्दों की मधुरता को मधुमक्खी और पुष्प के रूपक से प्रस्तुत किया। डॉ. गोपा शर्मा ने “हिंदी हमारी पहचान, हमारा गर्व, हमारी शान” शीर्षक रचना के माध्यम से हिंदी भाषा को भारतीय संस्कृति और पहचान का अभिन्न हिस्सा बताया।

मोहम्मद यूशा ने महंगाई और आमजन की परेशानियों पर आधारित अपनी संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली रचना प्रस्तुत की। सुषमा प्रेम पटेल ने “कवित्त की क्यारी” के माध्यम से साहित्य, मां शारदा और शब्द साधना के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। योगेश शर्मा ‘योगी’ ने आधुनिक दौर के रिश्तों और बदलते प्रेम पर हास्य-व्यंग्य से भरपूर प्रस्तुति देकर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।

हिंदी के महत्व पर वक्ताओं ने कहा कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा, संवेदनाओं और राष्ट्रीय पहचान का आधार है। उन्होंने लोगों से दैनिक जीवन में हिंदी के अधिकाधिक उपयोग और नई पीढ़ी को हिंदी साहित्य से जोड़ने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर लकी ड्रॉ का आयोजन भी किया गया। इसमें सफदर अली ‘सफदर’, डॉ. गोपा शर्मा, सुषमा प्रेम पटेल और यशवंत यदु को आकर्षक उपहार प्रदान किए गए। मुख्य पुरस्कार रुणाली चक्रवर्ती ने अपने नाम किया।

कार्यक्रम के अंत में सद्भावना साहित्य संस्थान की ओर से सभी कवियों, साहित्यप्रेमियों एवं अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया। आयोजन ने साहित्य, कविता, हास्य-व्यंग्य और हिंदी भाषा के प्रति जागरूकता का प्रभावी संदेश देते हुए सकारात्मक साहित्यिक वातावरण का निर्माण किया।

 

 

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