Guru Ghasidas Jayanti 2025: छत्तीसगढ़ में गुरु घासीदास जयंती के मौके पर हर जगह जैतखाम की साफ-सुथरी सजावट और सफेद रंग की चमक दिखती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जैतखाम हमेशा सफेद रंग का ही क्यों होता है? इसके पीछे एक ऐसी रोचक मान्यता है, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं।
देखिए गुरु घासीदास बाबा ने जैतखाम को सत्य, पवित्रता और सादगी का प्रतीक बताया था। सफेद रंग को ‘सत्य का रंग’ माना गया है,एक ऐसा रंग जिसमें कोई मिलावट, कोई छल, कोई दिखावा नहीं होता। जैतखाम की सीधी, आसमान की ओर उठी हुई आकृति यह संदेश देती है कि सत्य की राह हमेशा साफ, सीधी और उजियारी होनी चाहिए।
बता दें कि पुराने गांवों की कहानियों में एक दिलचस्प बात मिलती है। कहा जाता है कि पहले जैतखाम की ऊंचाई देखकर गांव की एकता और प्रतिष्ठा को आंका जाता था। जितना ऊंचा जैतखाम, उतना मजबूत समाज का विश्वास। यह सिर्फ धार्मिक प्रतीक नहीं था, बल्कि गांव के सामूहिक सम्मान का आधार भी माना जाता था।
सफेद रंग का उपयोग इसलिए भी किया जाता है क्योंकि यह मन की शांति का प्रतीक माना जाता है। जैतखाम के पास खड़े होने पर लोगों को एक अलग तरह की शांति और सुकून महसूस होता है। लोगो का मानना है कि इसका सीधा संबंध गुरु बाबा के उस संदेश से है, जिसमें उन्होंने कहा था “मन के भीतर सत्य होगा, तो बाहर भी उजाला होगा।
आज भी छत्तीसगढ़ के हर जिले, हर गांव में गुरु बाबा की जयंती पर जैतखाम की सफेद चमक न सिर्फ आस्था की पहचान है, बल्कि समाज की एकता और साफ-सुथरी सोच का प्रतीक भी मानी जाती है। सतनाम समाज इसे सिर्फ एक धार्मिक ध्वज के रूप में नहीं, बल्कि सत्य और समानता की राह पर चलने का संकल्प मानता है।
