Chaitra Navratri 2025 Second Day : चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी ज्ञान और तप की देवी मानी जाती हैं। कहा जाता है कि भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए मां पार्वती ने कठोर तपस्या की थी, जिसके कारण उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा।
मां ब्रह्मचारिणी श्वेत वस्त्र धारण करती हैं। उनके दाएं हाथ में जप माला और बाएं हाथ में कमंडल रहता है। शास्त्रों के अनुसार, इनकी पूजा से साधक को शारीरिक एवं मानसिक शुद्धि प्राप्त होती है और भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है।
पूजन विधि (2nd Day of Navratri Maa Brahmacharini)
1. प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2. घर के मंदिर में गंगाजल छिड़ककर शुद्धि करें।
3. मां ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
4. दीप प्रज्वलित करें और गंगाजल से अभिषेक करें।
5. मां को अक्षत, सिन्दूर और सफेद पुष्प अर्पित करें।
6. फल, मिठाई, खीर, बर्फी और पंचामृत का भोग लगाएं।
7. धूप और दीप जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
8. मां ब्रह्मचारिणी की आरती करें और प्रसाद वितरण करें।
मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय भोग
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को खीर, बर्फी, चीनी और पंचामृत का भोग लगाया जाता है।
शुभ रंग (2nd Day of Navratri Maa Brahmacharini)
मां ब्रह्मचारिणी को सफेद रंग बहुत प्रिय है। मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए आज के दिन मां दुर्गा को सफेद रंग के पुष्प अर्पित करने चाहिए।
मां ब्रह्मचारिणी का बीज मंत्र (2nd Day of Navratri Maa Brahmacharini)
मां ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने के लिए इन मंत्रों का 108 बार जाप करें:
1. ह्रीं श्री अम्बिकायै नमः
2. या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
व्रत कथा
मां ब्रह्मचारिणी ने राजा हिमालय के घर जन्म लिया था। नारदजी की सलाह पर उन्होंने कठोर तप किया, ताकि वे भगवान शिव को पति स्वरूप में प्राप्त कर सकें। कठोर तप के कारण उनका ब्रह्मचारिणी या तपश्चारिणी नाम पड़ा। भगवान शिव की आराधना के दौरान उन्होंने 1000 वर्ष तक केवल फल-फूल खाए तथा 100 वर्ष तक शाक खाकर जीवित रहीं। कठोर तप से उनका शरीर क्षीण हो गया। उनक तप देखकर सभी देवता, ऋषि-मुनि अत्यंत प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि आपके जैसा तक कोई नहीं कर सकता है। आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगा। भगवान शिव आपको पति स्वरूप में प्राप्त होंगे।
मां ब्रह्मचारिणी की आरती
जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो।।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसारा।।
जय गायत्री वेद की माता।
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।।
कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए।।
उसकी विरति रहे ठिकाने।
जो तेरी महिमा को जाने।।
रुद्राक्ष की माला ले कर।
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।।
आलस छोड़ करे गुणगाना।
मां तुम उसको सुख पहुंचाना।।
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।
पूर्ण करो सब मेरे काम।।
भक्त तेरे चरणों का पुजारी।
रखना लाज मेरी महतारी।।
