रायपुर। बच्चों को लैंगिक अपराधों से सुरक्षा, उनके कानूनी अधिकारों और ऑनलाइन सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर द्वारा सुरक्षित बचपन अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत 26 अक्टूबर को रायपुर के लगभग 21 विद्यालयों में 42 न्यायाधीशों ने विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के माननीय कार्यपालक अध्यक्ष द्वारा 10 अक्टूबर 2026 को अखिल भारतीय विद्यालय जागरूकता अभियान ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ का शुभारंभ किया गया था। यह अभियान लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो एक्ट) के प्रति बच्चों को जागरूक करने पर केंद्रित है।

जिला स्तरीय समन्वय समिति का गठन
अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रधान जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर के अध्यक्ष श्री बलराम प्रसाद वर्मा ने विशेष पहल की है। उनके निर्देश पर जिला स्तरीय समन्वय समिति गठित की गई है, जिसमें शिक्षा, पुलिस, महिला एवं बाल विकास तथा साइबर क्राइम विभाग को शामिल किया गया है।
समिति का उद्देश्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर बच्चों तक सुरक्षा और कानून से जुड़ी जानकारी पहुंचाना है। अभियान के प्रथम चरण के लिए 26 से 31 अक्टूबर 2026 तक रायपुर एवं गरियाबंद जिले के विद्यालयों का चयन किया गया है।

बच्चों को अधिकारों और सुरक्षा की जानकारी
अभियान के अंतर्गत विद्यार्थियों को व्यक्तिगत सुरक्षा, बाल अधिकार, ऑनलाइन सुरक्षा, लैंगिक अपराधों से बचाव और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही बच्चों को निःशुल्क विधिक सहायता और बाल संरक्षण से संबंधित उपलब्ध सुविधाओं के बारे में भी बताया जा रहा है।
चिन्हांकित विद्यालयों में रायपुर सिविल जिले के न्यायिक अधिकारियों को उपस्थित होकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को यह समझाने पर जोर दिया जा रहा है कि किसी भी प्रकार के शोषण या असुरक्षित स्थिति में सहायता कैसे प्राप्त की जा सकती है।

विशेषज्ञों की भी ली जा रही मदद
अभियान के दौरान बच्चों को बेहतर मार्गदर्शन देने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग से पॉक्सो पीड़ित बच्चों के सपोर्ट पर्सन, किशोर न्याय बोर्ड के सदस्यों, बाल कल्याण समिति के सदस्यों और बाल मनोविज्ञान विशेषज्ञों को रिसोर्स पर्सन के रूप में भेजने के निर्देश जारी किए गए हैं।
इन विशेषज्ञों के सहयोग से बच्चों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ समझने, उन्हें उचित परामर्श देने और जरूरत पड़ने पर संबंधित सहायता उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाएगा। इससे बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने के साथ सुरक्षित वातावरण का महत्व समझने में मदद मिलेगी।
नुक्कड़ नाटक और प्रश्नोत्तरी से जागरूकता
जागरूकता अभियान में विधि विद्यालयों और महाविद्यालयों को भी सहभागी बनाया गया है। उन्हें अपने नजदीकी चिन्हांकित स्कूलों में शिक्षकों और विधि विद्यार्थियों के सहयोग से नुक्कड़ नाटक, प्रश्नोत्तरी, ड्राइंग और पेंटिंग जैसी गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इन रचनात्मक गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों तक कानूनी जानकारी को सरल, रोचक और प्रभावी तरीके से पहुंचाना है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को बाल शोषण, बाल विवाह और इंटरनेट के सुरक्षित इस्तेमाल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूक किया जा रहा है।
छह प्रमुख थीम पर केंद्रित अभियान
‘सुरक्षित बचपन अभियान’ की मुख्य थीम ‘जागरूकता, सुरक्षा और संरक्षण हर बच्चे का अधिकार’ रखी गई है। इसके तहत विभिन्न विद्यालयों में बच्चों को जागरूक करने के लिए छह प्रमुख संदेशों पर जोर दिया जा रहा है।
इनमें ‘मेरा बचपन, मेरा अधिकार’, ‘कानून जानो, बचपन बचाओ’, ‘सुरक्षित क्लिक, सुरक्षित बचपन’, ‘बोलो, बताओ, बचाओ’, ‘न बाल विवाह, न बाल शोषण’ और ‘जागरूक बचपन, सशक्त भारत’ शामिल हैं।
अभियान के बाद भी जारी रहेंगे प्रयास
प्रधान जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री बलराम प्रसाद वर्मा ने बच्चों को देश की धरोहर बताते हुए उनके भविष्य को सुरक्षित और बेहतर बनाने को सामूहिक नैतिक जिम्मेदारी बताया है। अभियान के माध्यम से बच्चों की बौद्धिक एवं मानसिक क्षमता के विकास के लिए जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
निर्देशानुसार अभियान समाप्त होने के बाद भी स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों के लिए जागरूकता शिविर और अन्य गतिविधियां जारी रखने की योजना है। इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर को निरंतर प्रयास करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बच्चों को उनके अधिकारों और सुरक्षा के प्रति लगातार जागरूक किया जा सके।
