Nag Panchami 2026: नागपंचमी का पर्व आज श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। हिन्दू धर्म में इस दिन नाग देवता की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि नागपंचमी पर विधि-विधान से पूजा करने से कालसर्प दोष, सर्प भय और सर्पदंश से जुड़ी बाधाओं से राहत मिलती है। श्रद्धालु भगवान शिव के साथ नाग देवता की आराधना कर सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना करते हैं।![]()
शुभ मुहूर्त
इस वर्ष नागपंचमी का शुभ पूजा मुहूर्त सुबह 6:15 बजे से 8:31 बजे तक रहेगा। इस दिन शुभ योग, मुद्गर योग और गजकेसरी योग का विशेष संयोग बन रहा है। वहीं सुबह 7:59 बजे सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में प्रवेश करेंगे, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
नागपंचमी का महत्व
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार नागपंचमी पर भगवान शिव और नाग देवता की पूजा करने से सुख, शांति, मानसिक संतुलन और विजय की प्राप्ति होती है। इस दिन अनंत, वासुकी, तक्षक, कर्कोटक, पद्म, महापद्म, शंखपाल और कुलिक नागों का स्मरण करना शुभ माना जाता है।
जीवित नाग को दूध न पिलाएं
धार्मिक मान्यता के अनुसार नाग देवता की प्रतिमा का जल और कच्चे दूध से अभिषेक करना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि जीवित सांप को दूध पिलाना उसके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए केवल प्रतिमा का अभिषेक करें और पूजा-अर्चना करें।
नागपंचमी की पूजा विधि
• सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
• घर या पूजा स्थल पर गाय के गोबर से नाग का स्वरूप बनाएं या नाग देवता की प्रतिमा स्थापित करें।
• भगवान शिव का जलाभिषेक करें।
• नाग देवता का जल और कच्चे दूध से अभिषेक करें।
• चंदन, अक्षत, हल्दी, पुष्प, फल, मेवा, अबीर, गुलाल और मेहंदी अर्पित करें।
• धूप और दीप जलाकर आरती करें।
• नाग देवता के मंत्रों का जाप करें।
• अंत में परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करें।
