Raipur Skywalk: रायपुर स्काईवॉक का काम 10 महीने बाद भी अधूरा, लोगों को चढ़नी पड़ेंगी 100 सीढ़ियां

Raipur Skywalk

Raipur Skywalk: राजधानी रायपुर का बहुचर्चित स्काईवॉक प्रोजेक्ट एक बार फिर विवादों में है। 21 मई 2025 से दोबारा शुरू हुआ निर्माण कार्य 20 अप्रैल 2026 तक पूरा होना था, लेकिन तय समय सीमा गुजरने के बाद भी प्रोजेक्ट अधूरा पड़ा है। मौके पर फिलहाल केवल सीढ़ियां लगाने का काम चल रहा है, जबकि लिफ्ट और एस्केलेटर अब तक जमीन पर नहीं उतर पाए हैं।tcw

स्काईवॉक का उपयोग करने वाले लोगों को करीब 90 से 100 सीढ़ियां चढ़नी और उतरनी पड़ेंगी। रेरा ऑफिस की ओर से स्काईवॉक पर चढ़ने के लिए 50 से अधिक सीढ़ियां चढ़नी होंगी, जबकि मेकाहारा-सेंट्रल जेल रोड की ओर उतरने के लिए लगभग 45 सीढ़ियां उतरनी पड़ेंगी।

12 जगहों से होगी एंट्री और एग्जिट

स्काईवॉक में कुल 12 एंट्री और एग्जिट पॉइंट बनाए जा रहे हैं। रेरा ऑफिस, कलेक्ट्रेट टाउन हॉल, घड़ी चौक, तहसील ऑफिस, जिला न्यायालय परिसर और सेंट्रल जेल के सामने सीढ़ियां लगाई जा चुकी हैं। वहीं डीकेएस अस्पताल, शहीद स्मारक, मल्टी लेवल पार्किंग, पुराने जेल मुख्यालय और डेंटल कॉलेज की ओर अभी काम बाकी है।

10 महीने बाद भी अधूरा प्रोजेक्ट

करीब 8 साल से अधूरे पड़े इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए PWD ने 37.75 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया था। PSA कंस्ट्रक्शन कंपनी निर्माण कार्य कर रही है, लेकिन 10 महीने बाद भी प्रोजेक्ट अधूरा है।

PWD अधिकारियों के अनुसार, शास्त्री चौक पर रोटरी निर्माण का काम जारी है, जिससे स्काईवॉक को वायर के जरिए मजबूती दी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि ट्रैफिक दबाव के कारण दिन में काम संभव नहीं है, इसलिए रात में निर्माण कार्य किया जा रहा है।

लिफ्ट और एस्केलेटर पर अब भी संशय

PWD के मुख्य अभियंता एस.के. कोरी ने बताया कि स्काईवॉक में 8 एस्केलेटर और 3 लिफ्ट लगाए जाने हैं, लेकिन अब तक इनके स्थान तय नहीं किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है।

कांग्रेस ने साधा निशाना

कांग्रेस जिलाध्यक्ष श्री कुमार मेमन ने स्काईवॉक को “सफेद हाथी” बताते हुए कहा कि इस प्रोजेक्ट पर 100 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं, जबकि इसकी उपयोगिता बेहद कम है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रोजेक्ट पूर्व मंत्री राजेश मूणत की जिद का परिणाम है और सरकार उसी जिद को पूरा कर रही है।

उन्होंने कहा कि अगर यह राशि शहर के वार्डों में खर्च होती तो सड़क, नाली और बिजली जैसी मूलभूत समस्याओं का समाधान हो सकता था।

 

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