RTE Admission 2026: छत्तीसगढ़ में प्री-प्राइमरी कक्षाओं को शिक्षा के अधिकार (RTE) के दायरे से बाहर करने का मामला अब कानूनी बहस का विषय बन गया है। राज्य सरकार के इस फैसले को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, जिस पर सुनवाई जारी है।![]()
दरअसल, राज्य सरकार ने 16 दिसंबर 2025 को आदेश जारी कर नर्सरी, LKG और UKG जैसी प्री-स्कूल कक्षाओं को RTE के दायरे से बाहर कर दिया। इसके खिलाफ छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने याचिका दाखिल कर इसे असंवैधानिक बताया है।
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में दायर अपने जवाब में कहा है कि प्री-स्कूल स्तर पर RTE लागू करने से हर साल करीब 60 से 70 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ता है। लेकिन इस थोड़ी राशि का इंपैक्ट लगभग 38000 बच्चों पर पड़ेगा जो RTE के तहत प्री प्राइमरी कक्षाओं में दाखिला ले सकते हैं। सरकार का तर्क है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 6 से 14 वर्ष के बच्चों (कक्षा 1 से 8) के लिए लागू है, ऐसे में प्री-प्राइमरी को इसमें शामिल करना अनिवार्य नहीं है।
2015-16 में लिया गया था उल्टा फैसला
गौरतलब है कि वर्ष 2015-16 में राज्य सरकार ने ही प्री-स्कूल कक्षाओं को RTE के दायरे में शामिल किया था। उस समय तर्क दिया गया था कि 3 से 6 वर्ष की उम्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से बच्चों का समग्र विकास बेहतर होता है और ड्रॉपआउट दर में कमी आती है।
कानूनी विवाद की जड़ क्या है?
RTE एक्ट की धारा 12(1)(c) के अनुसार, यदि कोई निजी स्कूल नर्सरी या केजी से कक्षाएं संचालित करता है, तो उसे वहीं से 25% आरक्षण लागू करना होता है। इसी प्रावधान की विस्तृत व्याख्या के आधार पर पहले प्री-प्राइमरी को शामिल किया गया था।
याचिका में कहा गया है कि सरकार का यह नया फैसला बच्चों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है और इससे गरीब वर्ग के बच्चों के शुरुआती शिक्षा के अवसर प्रभावित होंगे। मामले में अब हाईकोर्ट का अंतिम फैसला महत्वपूर्ण होगा, जो यह तय करेगा कि प्री-प्राइमरी कक्षाएं RTE के दायरे में रहेंगी या नहीं।




