CG Naxalism End: 72000 जवानों की मुहिम से ढहा नक्सलवाद, 535 नक्सली ढेर; 2898 ने किया सरेंडर, अब 23 बाकी

CG Naxalism End

CG Naxalism End: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद पर अब निर्णायक प्रहार हुआ है। सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई और रणनीतिक अभियान के चलते प्रदेश में नक्सलवाद लगभग समाप्ति की कगार पर पहुंच गया है। आंकड़ों के अनुसार अब तक 535 नक्सली मारे जा चुके हैं, जबकि 2898 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है। वर्तमान में केवल 23 नक्सली ही सक्रिय बचे बताए जा रहे हैं।

नक्सलवाद की शुरुआत वर्ष 1968 में आंध्रप्रदेश के रास्ते बस्तर में हुई थी। शुरुआती दौर में विचारधारा के प्रचार से शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे हिंसक रूप लेता गया। नक्सलियों ने ग्रामीणों को हथियार देकर जनताना सरकार स्थापित की और भय का माहौल बनाकर समानांतर व्यवस्था खड़ी कर ली।

1990 के दशक में नक्सलवाद सरगुजा तक फैल गया और वर्ष 2010 तक इसका प्रभाव चरम पर रहा। इसके बाद सुरक्षा बलों ने सघन अभियान चलाते हुए सरगुजा को 2015 में नक्सलमुक्त घोषित कर दिया। हालांकि, बस्तर क्षेत्र लंबे समय तक नक्सलियों का गढ़ बना रहा, जहां घने जंगल, पहाड़ और सीमावर्ती राज्यों का भौगोलिक लाभ उन्हें मिलता रहा।

वर्ष 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाया गया। करीब 72 हजार जवानों की तैनाती कर बड़े पैमाने पर अभियान चलाया गया। इस दौरान आधुनिक तकनीक और विभिन्न एजेंसियों की निगरानी से नक्सल नेटवर्क को कमजोर किया गया।

Bijapur Encounter

21 मई 2025 को नक्सलियों के महासचिव बसवाराजू के मारे जाने के बाद आंदोलन को बड़ा झटका लगा। इसके बाद 18 नवंबर 2025 को शीर्ष कमांडर हिड़मा के मारे जाने से नक्सल संगठन पूरी तरह बिखर गया और आत्मसमर्पण का सिलसिला तेज हो गया।

फिलहाल सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार छत्तीसगढ़ में पांच एरिया कमेटियों में कुल 23 नक्सली ही बचे हैं, जो गांवों में छिपे हुए हैं और उन्हें आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। हालांकि, कुछ बड़े नक्सली नेता अब भी अन्य राज्यों में सक्रिय बताए जा रहे हैं।

 

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