Chaitra Navratri 2025: हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व विशेष महत्व रखता है। यह देवी दुर्गा की आराधना का पर्व है, जिसमें भक्तजन नौ दिनों तक माता के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं। इस बार माता हाथी पर सवार होकर आएंगी, जिसे शुभ संकेत माना जाता है। नवरात्रि में 6 अप्रैल तक माता के नौ रूपों की पूजा की जाएगी और 7 अप्रैल को नवरात्रि व्रत का पारण किया जाएगा। इस साल एक तिथि का क्षय होने के कारण नवरात्रि 9 के बजाय 8 दिनों के होंगे। चैत्र नवरात्रि का पहला दिन चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा यानि आज 30 मार्च 2025, शनिवार को है। नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मान्यता है कि मां शैलपुत्री की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। नवरात्रि में 6 अप्रैल तक माता के नौ रूपों की पूजा की जाएगी और 7 अप्रैल को नवरात्रि व्रत का पारण किया जाएगा। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना भी की जाती है।
इस दौरान व्रत और पूजा करने के कुछ विशेष नियम और विधियाँ होती हैं। आज हम आपको बताएंगे कि किन नियमों का पालन आपको नवरात्रि के दौरान करना चाहिए।
व्रत और आहार से जुड़े नियम
जो लोग व्रत नहीं रख रहे हैं उन्हें भी इस दौरान तामसिक भोजन करने से बचना चाहिए। वहीं व्रत रखने वाले व्यक्ति फलाहार कर सकते हैं।
लहसुन, प्याज जैसी तामसिक भोज्य पदार्थों की नवरात्रि में सख्त मनाही होती है।
व्रत रखने वाले लोग केवल फल, दूध, सिंघाड़ा आटा, साबुदाना, मखाना और कुट्टू आटे का सेवन कर सकते हैं।
नमक खाना आवश्यक हो तो सेंधा नमक का ही उपयोग करें।
अनाज और नमक का सेवन अष्टमी/नवमी तिथि को कन्या पूजन के बाद ही आपको करना चाहिए।
इन चीजों का करें परहेज
व्रतधारी को ब्रह्मचर्य का पूर्ण रूप से पालन करना चाहिए। किसी भी तरह के बुरे विचार मन में न आएं इसके लिए धार्मिक पुस्तकें आप पढ़ सकते हैं।
क्रोध, अहंकार, किसी की निंदा और झूठ बोलने से भी नवरात्रि के दौारन बचें।
चैत्र नवरात्रि के दौरान बाल कटवाना, नाखून काटना और शेविंग करना वर्जित होता है।
नवरात्रि के दौरान घर की साफ-सफाई और शुद्धता का विशेष ध्यान आपको रखना चाहिए, चाहे आप व्रत रखें या न रखें।
इन बातों का रखें ख्याल
नवरात्रि में आपको रात को जल्दी सोना और सुबह जल्दी उठना चाहिए।
पूजा के प्रसाद और जल को किसी भी अशुद्ध स्थान पर न रखें।
व्रतधारी को पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ व्रत का पालन करना चाहिए।
अगर पूरे परिवार के साथ पूजा करेंगे तो इसे बेहद शुभ माना जाता है।
नवरात्रि पूजन
नवरात्रि में प्रतिदिन आपको माता दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा करनी चाहिए। माता रानी को फूल, फूल, भोग दिन के अनुसार अर्पित करना चाहिए। श्री दुर्गा सप्तशती, श्री दुर्गा चालीसा और देवी माहत्म्य का पाठ आपको नवरात्रि के दौरान कर सकते हैं। आपको बता दें कि इस साल 31 मार्च को तृतीया तिथि के क्षय होने के कारण ब्रह्माचारिणी और माता चंद्रघंटा की पूजा एक ही दिन होगी।

मां शैलपुत्री पूजा विधि
मां शैलपुत्री के पूजन के लिए सबसे पहले स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ वस्त्र धारण करें। एक चौकी लें और उसे गंगाजल से छिड़ककर शुद्ध कर लें। माां दुर्गा की प्रतिमा को स्थापित करें। मां दुर्गा के समक्ष धूप, दीप व शुद्ध गाय के घी का दीपक जलाएं। मां शैलपुत्री को भोग लगाएं व आरती उतारें। दुर्गा चालीसा व सप्तशती पाठ करें।
मां शैलपुत्री भोग
मां शैलपुत्री की सवारी गाय है। इसलिए मान्यता है कि मां को गाय से बनी चीजों का भोग प्रिय है। आप मां शैलपुत्री को खीर या दूध से बनी मिठाइयों को भोग लगा सकते हैं।
मां शैलपुत्री मंत्र
1. ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ शैलपुत्री देव्यै नमः
2. या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
नवरात्रि के पहले दिन का शुभ रंग
नवरात्रि के पहले दिन का शुभ नारंगी है। मान्यता है कि इस दिन नारंगी रंग के वस्त्र पहनना शुभ होता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ठीहा छत्तीसगढ़ एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
