Deepawali 2026: दीपावली 2026 का पर्व इस वर्ष 8 नवंबर को मनाया जाएगा। कार्तिक अमावस्या के दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की विशेष पूजा का विधान है। मां लक्ष्मी को धन, सुख और समृद्धि की देवी माना जाता है, जबकि भगवान विष्णु सृष्टि के पालनकर्ता हैं। अक्सर देवी लक्ष्मी की ऐसी तस्वीर दिखाई देती है, जिसमें वे भगवान विष्णु के चरणों के पास विराजमान होती हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह केवल एक चित्र नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला गहरा संदेश भी है।
भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की मुद्रा का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु धर्म, कर्तव्य और पुरुषार्थ के प्रतीक हैं। उन्होंने विभिन्न अवतारों के माध्यम से सदैव धर्म की स्थापना और मानव कल्याण का संदेश दिया। मां लक्ष्मी का उनके चरणों के समीप बैठना इस बात का प्रतीक माना जाता है कि सच्ची समृद्धि उसी व्यक्ति को प्राप्त होती है, जो ईमानदारी, परिश्रम और धर्म के मार्ग पर चलते हुए अपने कर्तव्यों का पालन करता है।
धन नहीं, कर्म को दें प्राथमिकता
यह चित्र हमें सिखाता है कि धन जीवन का लक्ष्य नहीं, बल्कि अच्छे कार्यों का साधन होना चाहिए। जो व्यक्ति निस्वार्थ भाव से कर्म करता है, समाज और परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभाता है, उसके जीवन में सुख, समृद्धि और सम्मान स्वयं आने लगते हैं। इसलिए धन के पीछे भागने के बजाय अपने कर्म और चरित्र को श्रेष्ठ बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
धन का अहंकार नहीं, सदुपयोग करें
मां लक्ष्मी का भगवान विष्णु के चरणों में विराजना इस बात का भी संकेत है कि धन को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। जब व्यक्ति धन को ही सबसे बड़ा मान लेता है, तब अहंकार जन्म लेता है और यही उसके पतन का कारण बनता है। इसलिए धन का उपयोग सेवा, परोपकार, धर्म और सद्कर्मों में करना चाहिए। ऐसे व्यक्ति पर मां लक्ष्मी की कृपा लंबे समय तक बनी रहती है।
भाग्य नहीं, पुरुषार्थ दिलाता है सफलता
इस दिव्य स्वरूप का एक महत्वपूर्ण संदेश यह भी है कि केवल भाग्य के भरोसे बैठने से सफलता नहीं मिलती। निरंतर परिश्रम, ईमानदारी और धर्म के अनुसार किया गया कर्म ही जीवन में स्थायी सुख और समृद्धि प्रदान करता है। मां लक्ष्मी वहीं स्थायी रूप से निवास करती हैं, जहां परिश्रम, सत्य, सदाचार और सेवा का भाव होता है।



