CG News: कांकेर जिले के चारामा विकासखंड के ग्राम भिलाई की महिलाओं ने इस दीपावली गोबर से बने पर्यावरण अनुकूल दीयों के जरिए आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी है। प्राकृतिक दीयों का निर्माण कर महिलाएं न केवल घरों को रोशन कर रही हैं, बल्कि अपने परिवार की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। स्थानीय स्तर पर तैयार इन उत्पादों को बाजार में अच्छी मांग मिल रही है।
सरगम उत्पादक समूह से जुड़ी महिलाओं ने बिहान योजना के माध्यम से संगठित होकर आजीविका का मजबूत मॉडल तैयार किया है। वर्ष 2016 में 10 महिलाओं के साथ शुरू हुआ यह समूह आज 36 महिलाओं को रोजगार उपलब्ध करा रहा है। समूह स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर विभिन्न उत्पाद तैयार कर आर्थिक रूप से सशक्त बनने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।
गोबर से तैयार किए जा रहे दीयों की पूरी प्रक्रिया महिलाएं स्वयं करती हैं। पहले गोबर को एकत्र कर उसका मिश्रण तैयार किया जाता है, फिर सांचों की मदद से विभिन्न आकार के दीये बनाए जाते हैं। सुखाने के बाद इन्हें बिक्री के लिए तैयार किया जाता है। प्राकृतिक सामग्री से बने ये दीये पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण महिलाओं के हुनर को भी नई पहचान दिला रहे हैं।
समूह की सदस्य सुभद्रा नागराज ने बताया कि वर्ष 2022 में गोबर के दीये बनाने की शुरुआत की गई थी। पहले वर्ष करीब 10 हजार दीये तैयार किए गए, जिससे लगभग 20 हजार रुपये का लाभ हुआ। इस सफलता के बाद महिलाओं का उत्साह बढ़ा और उत्पादन लगातार बढ़ता गया।
इस वर्ष दीपावली के अवसर पर समूह अब तक 11 हजार 400 से अधिक गोबर के दीये बेच चुका है। लगातार नए ऑर्डर मिलने से महिलाएं प्रतिदिन लगभग 500 दीयों का निर्माण कर रही हैं। इनकी बिक्री सी-मार्ट, स्थानीय हाट-बाजारों और अन्य बाजारों में की जा रही है। रायपुर से भी बड़ी संख्या में ऑर्डर मिलने से समूह की आय में बढ़ोतरी हुई है।
एक समूह, कई आजीविका के साधन
सरगम उत्पादक समूह केवल गोबर के दीयों तक सीमित नहीं है। महिलाएं आम का अमचूर पाउडर, इमली का संग्रहण एवं प्रसंस्करण, आम का अचार, राखी निर्माण और मशरूम उत्पादन जैसे कई कार्य भी कर रही हैं। तैयार उत्पादों की बिक्री स्थानीय बाजारों के साथ-साथ सी-मार्ट के माध्यम से भी की जा रही है।
मशरूम उत्पादन से भी बढ़ी आमदनी
समूह की महिलाओं ने मशरूम उत्पादन में भी सफलता हासिल की है। लगभग 4 हजार रुपये की लागत से तैयार मशरूम को 7 हजार रुपये में बेचकर करीब 3 हजार रुपये का लाभ अर्जित किया गया। कम समय में हुए अच्छे मुनाफे के बाद अब समूह की अन्य महिलाएं भी इस कार्य से जुड़ रही हैं।
महिलाओं ने बताया कि बिहान योजना के तहत समूह को बैंक से 2 लाख रुपये का ऋण और 50 हजार रुपये का अनुदान मिला। ऋण की शेष राशि का भुगतान किस्तों में किया जा रहा है। इस आर्थिक सहयोग से समूह ने अपने कार्य का विस्तार किया है और नए रोजगार के अवसर भी तैयार किए हैं।
‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को मिल रही मजबूती
ग्राम भिलाई की महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे गोबर के दीये स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को भी मजबूती दे रहे हैं। इन उत्पादों से महिलाओं को रोजगार और बेहतर आय मिल रही है, वहीं पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। दीपावली के इस पर्व पर इन महिलाओं के हाथों से बने दीये आत्मनिर्भरता, स्वावलंबन और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देने का संदेश भी दे रहे हैं।


