Bastar Dussehra 2026: विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की प्रमुख परंपरा मावली परघाव में शामिल होने के लिए मां दंतेश्वरी की पावन डोली और राजछत्र रविवार को दंतेवाड़ा से जगदलपुर के लिए रवाना हुए। शारदीय नवरात्र की अष्टमी पर गाजे-बाजे, पारंपरिक वाद्य यंत्रों, लोक नृत्य और जयकारों के बीच मां की डोली को श्रद्धापूर्वक विदाई दी गई।
डोली यात्रा के दौरान पूरा दंतेवाड़ा भक्तिमय माहौल में डूबा नजर आया। हजारों श्रद्धालु मां दंतेश्वरी के जयकारे लगाते हुए यात्रा में शामिल हुए। मंदिर के मुख्य द्वार पर पुलिस बल ने सलामी देकर मां को सम्मान अर्पित किया।
800 वर्षों से निभाई जा रही है ऐतिहासिक परंपरा
मावली परघाव बस्तर दशहरा की सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक रस्मों में से एक मानी जाती है। करीब 800 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के तहत मां दंतेश्वरी की डोली दंतेवाड़ा से जगदलपुर पहुंचती है, जहां मावली माता से उनका पारंपरिक मिलन कराया जाता है। यह परंपरा बस्तर की आदिवासी आस्था, राजपरंपरा और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक मानी जाती है।
27 अक्टूबर को लौटेगी मां की डोली
मां दंतेश्वरी की डोली निर्धारित पूजा स्थलों पर रुकते हुए जगदलपुर पहुंचेगी, जहां बस्तर दशहरा की विभिन्न पारंपरिक रस्में संपन्न होंगी। तय कार्यक्रम के अनुसार 27 अक्टूबर को मां दंतेश्वरी की डोली और राजछत्र वापस दंतेवाड़ा के लिए रवाना होंगे। आस्था, संस्कृति और परंपरा का यह अनूठा आयोजन हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।




