Raipur School: रायपुर जिले के धरसींवा विकासखंड अंतर्गत शासकीय माध्यमिक शाला पिरदा से शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को उजागर करने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। इस मिडिल स्कूल में छठवीं से आठवीं कक्षा तक कुल 166 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन पिछले एक हफ्ते से स्कूल में एक भी शिक्षक पढ़ाने नहीं आया है। जानकारी के मुताबिक, स्कूल के सभी शिक्षकों को ‘SIR’ (स्पेशल समरी रिवीजन) कार्य के तहत BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) की ड्यूटी में लगा दिया गया है। शिक्षकों के नदारद रहने से बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से ठप पड़ गई है और उनका भविष्य राम भरोसे है।
ग्रामीणों ने जताई कड़ी नाराजगी
स्कूल की इस स्थिति पर ग्रामीणों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षकों के नहीं होने से बच्चों का भविष्य अंधकार में जा रहा है। उन्होंने प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब अन्य कार्यों के लिए सरकार टेंडर निकाल सकती है, तो BLO जैसे काम के लिए बेरोजगार युवाओं को 10-12 हजार रुपये देकर एक महीने के लिए नियुक्ति क्यों नहीं दी जा सकती?
ग्रामीणों ने एक बड़ी और गंभीर चिंता यह भी जताई कि स्कूल का गेट खुला रहता है; ऐसे में अगर कोई असामाजिक तत्व (उपद्रवी) स्कूल में घुस जाए या अचानक किसी बच्चे की तबीयत खराब हो जाए, चक्कर आ जाए, तो वहां उनकी देखरेख करने या जिम्मेदारी लेने वाला कोई मौजूद नहीं है।
देखें वीडियो–https://youtu.be/8zR9Fy8O3NE
प्राइमरी स्कूल के प्रभारी शिक्षक की मजबूरी
इसी स्कूल परिसर में एक प्राइमरी स्कूल भी संचालित होता है, जिसमें 167 बच्चे दर्ज हैं। इस प्राइमरी स्कूल के हेडमास्टर ने बताया कि उनके स्कूल में कुल 7 शिक्षकों का स्टाफ है, जिनमें से 4 शिक्षकों की ड्यूटी भी SIR (BLO) में लगा दी गई है। मिडिल स्कूल के बारे में उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें केवल मौखिक रूप से मिडिल स्कूल की ‘देखरेख’ करने को कहा गया है। जबकि मिडिल स्कूल में पढ़ाई-लिखाई बिल्कुल नहीं हो रही है।
बच्चे खुद लगा रहे हाजिरी, सिलेबस अधूरा
शिक्षकों के न आने पर बच्चों ने अपनी परेशानी साझा करते हुए कहा कि वे क्लास में खुद ही एक-दूसरे की हाजिरी ले रहे हैं। बच्चे स्कूल आकर खुद से किताबें खोलकर पढ़ाई करने की कोशिश करते हैं और अपनी कॉपियां पूरी कर रहे हैं। बच्चों ने बताया कि उनकी अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं नजदीक हैं, लेकिन अब तक मात्र दो से छह पाठ ही पढ़ाए गए हैं। शिक्षक न होने के कारण उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि वे आगे की पढ़ाई कैसे करें।
जिम्मेदार अधिकारियों ने साधी चुप्पी
इस बेहद गंभीर मामले पर जब शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उनका रवैया भी निराशाजनक रहा। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) ने फोन का कोई जवाब नहीं दिया (फोन नहीं उठाया)। वहीं, जब जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो वे अपने कार्यालय में नहीं मिले और उनका फोन भी नहीं लगा।
‘ठीहा छत्तीसगढ़’ की विस्तृत रिपोर्ट
आपको बता दें कि शिक्षा व्यवस्था की इस बदहाली और बच्चों की परेशानी को लेकर प्रदेश के प्रमुख डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म ‘ठीहा छत्तीसगढ़’ ने 27 अक्टूबर को ग्राउंड जीरो से इसकी एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें इस पूरे मामले को प्रमुखता से सामने लाया गया है।





