Diwali 2026: दिवाली में क्यों की जाती है गौरा-गौरी की पूजा? लक्ष्मी पूजन के शुभ मुहूर्त से लेकर जानें सबकुछ..

Diwali 2026

Diwali 2026: दीपावली का पर्व पूरे देश में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इस दिन गौरा-गौरी पूजा की भी विशेष परंपरा निभाई जाती है। इस वर्ष दीपावली 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी। इसी रात लक्ष्मी पूजन के बाद आधी रात से गौरा-गौरी प्रतिमा स्थापना का शुभ कार्य शुरू होगा। अगले दिन गोवर्धन पूजा के बाद गाजे-बाजे और जसगीत के साथ प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा।

लक्ष्मी पूजा के साथ होती है गौरा-गौरी आराधना

छत्तीसगढ़ के गांवों और शहरों में दीपावली पर भगवान शिव और माता पार्वती के स्वरूप गौरा-गौरी की पूजा का विशेष महत्व है। रायपुर समेत प्रदेश के कई स्थानों पर गौरा-गौरी चौक में प्रतिमाएं स्थापित कर पारंपरिक रीति-रिवाज से पूजा की जाती है। पूरी रात भजन, जसगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है।

तालाब की मिट्टी से बनाई जाती हैं प्रतिमाएं

परंपरा के अनुसार गांव के बुजुर्ग तालाब की पवित्र मिट्टी लाकर गौरा-गौरी की प्रतिमाएं तैयार करते हैं। कई स्थानों पर बाजार से लाई गई प्रतिमाओं की भी स्थापना की जाती है। श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ इनका पूजन कर सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना करते हैं।

शिव-पार्वती विवाह की निभाई जाती है रस्म

गौरा-गौरी पूजा के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की रस्में निभाई जाती हैं। श्रद्धालु पूरी रात जागरण, भजन और जसगीत करते हैं। अगले दिन गोवर्धन पूजा के बाद प्रतिमाओं का नदी या तालाब में विधि-विधान से विसर्जन किया जाता है।

दीपावली पर लक्ष्मी पूजन का महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार कार्तिक अमावस्या के दिन भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे थे। उनकी वापसी की खुशी में दीप जलाकर उत्सव मनाया गया, तभी से दीपावली का पर्व मनाया जाता है। इस दिन प्रदोष काल में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि और धन-वैभव का वास होता है।

दीपावली 2026 तिथि

  • अमावस्या तिथि प्रारंभ – 8 नवंबर, सुबह 11:27 बजे
  • अमावस्या तिथि समाप्त – 9 नवंबर, रात 12:31 बजे

लक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त

  • लक्ष्मी पूजन – शाम 5:54 बजे से 7:50 बजे तक
  • प्रदोष काल – शाम 5:31 बजे से 8:09 बजे तक
  • वृषभ लग्न – शाम 5:54 बजे से 7:50 बजे तक
  • निशीथ काल – रात 11:39 बजे से 12:31 बजे तक (9 नवंबर)
  • सिंह लग्न – रात 12:24 बजे से 2:42 बजे तक (9 नवंबर)

शुभ चौघड़िया

  • प्रातः – सुबह 11:27 बजे से 12:05 बजे तक
  • अपराह्न – दोपहर 1:26 बजे से 2:48 बजे तक
  • सायंकाल – शाम 5:31 बजे से रात 10:27 बजे तक
  • रात्रि – रात 1:43 बजे से 3:22 बजे तक (9 नवंबर)
  • उषाकाल – सुबह 5:00 बजे से 6:39 बजे तक (9 नवंबर)

लक्ष्मी पूजन की सरल विधि

पूजा स्थल की अच्छी तरह साफ-सफाई कर ईशान कोण में चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं। चौकी पर भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। पास में जल से भरा कलश स्थापित करें और आम के पत्ते व नारियल रखें।

सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन करें। इसके बाद मां लक्ष्मी को रोली, अक्षत, कमल, लाल पुष्प, खील, बताशे, मिठाई और फल अर्पित करें। फिर भगवान कुबेर की पूजा करें। अंत में दीप जलाकर आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।

 

 

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